Saturday, May 30, 2009

unknown

अपनी बीती हुई रंगीन जवानी देगा
मुझको तस्वीर भी देगा तोह पुरानी देगा
आदतें मिलती हैं सूरज से बोहत कुछ उसकी
वक्त-ऐ-रुखसत भी वो इक शाम सुहानी देगा
मेरे माथे की लकीरों में इजाफा कर के
वो भी माजी की तरह अपनी निशानी देगा
बर्फ हो जाएगा जब मेरे लहू का दरिया
तब कहीं जा के वो मौजों को रवानी देगा
मैंने ये सोच के बोए नही ख्वाबों के दरख्त
कौन जंगल में लगे पेड को पानी देगा .. !!!

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