Friday, May 22, 2009

unknown

गदा[फकीर] दस्त-ए-अहल-ए-करम देखते हैं
हम अपना ही दम और क़दम देखते हैं
न देखा जो कुछ जाम में जम* ने अपने
सो यक कतरा-ए-मय में हम देखते हैं
यह रंजिश में हमको है बे-इख्तियारी
तुझे तेरी खा कर क़सम देखते हैं
गरज कुफ्र से कुछ, न दीं से है मतलब
तमाशा-ए- देर-ओ-हरम देखते हैं
मिटा जाये है हरफ हरफ आंसूओं से
जो नामा उसे कर रकम देखते हैं
मगर तुझ से रंजीदा खातिर है सौदा
उसे तेरे कूचे में कम देखते हैं

*जाम यानी शराब का प्याला और जम मानी जमशेद जो कि ईरान का एक बादशाह था जिसके बारे में मशहूर है कि उसके पास एक प्याला था जिसमें वोह सारी दुनिया का नज़ारा कर लेटा था।

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