Saturday, May 30, 2009

unknown

आँखों मैं कई सपने सजा कर रोये बोहोत है हम
दिल को नै दुनिया दिखा कर रोये बोहोत है हम
वोह बदल गया तोह फेर ली हमने भी नज़र अपनी
पर उससके खतों को जला कर रोये बोहोत है हम
लौट आए थो आहें उस्सकी महफिल से बचा कर आना अपनी
पर उसकी बज्म से आ कर रोये बोहोत है हम
जिसे किया था रोशन तमनाओं से हमने अपनी
उस शाम-ऐ-वफ़ा को भुजा कर रोये बोहोत है हम
जिनके साए में की थी हमने कई बातें
उन् बागों में तन्हा जा कर रोये बोहोत है हम
किस कदर खुशी से किया हम दम को रुखसत हमने
मगर सब से नज़र बचा के रोये बोहोत है हम
हौसला टूटने का हो तोह वफा करना किसी से
यह बातें लोगों को सुना कर रोये बोहोत है हम
फिर यूँ हुआ के आँखों ने कई रतजगे देखे
पलकों पे तेरी याद बिठा कर रोये बोहोत है हम
वोही आज मुझसे मेरे दर्द की वजह चाहता है
जिसकी बातें औरों को सुना कर रोये बोहोत है हम

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