आँखों मैं कई सपने सजा कर रोये बोहोत है हम
दिल को नै दुनिया दिखा कर रोये बोहोत है हम
वोह बदल गया तोह फेर ली हमने भी नज़र अपनी
पर उससके खतों को जला कर रोये बोहोत है हम
लौट आए थो आहें उस्सकी महफिल से बचा कर आना अपनी
पर उसकी बज्म से आ कर रोये बोहोत है हम
जिसे किया था रोशन तमनाओं से हमने अपनी
उस शाम-ऐ-वफ़ा को भुजा कर रोये बोहोत है हम
जिनके साए में की थी हमने कई बातें
उन् बागों में तन्हा जा कर रोये बोहोत है हम
किस कदर खुशी से किया हम दम को रुखसत हमने
मगर सब से नज़र बचा के रोये बोहोत है हम
हौसला टूटने का हो तोह वफा करना किसी से
यह बातें लोगों को सुना कर रोये बोहोत है हम
फिर यूँ हुआ के आँखों ने कई रतजगे देखे
पलकों पे तेरी याद बिठा कर रोये बोहोत है हम
वोही आज मुझसे मेरे दर्द की वजह चाहता है
जिसकी बातें औरों को सुना कर रोये बोहोत है हम
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