Saturday, June 6, 2009

syed abbas hussain ki shayyiri

आज बंद कर रहा है दर कोई
हो गया फिर से दर-ब-दर कोई
जिंदगी से मुझे दरर वाइज़
मौत से कब मुझे था डर कोई
साथ तो चाहते हैं सब मेरा
साथ देता नहीं मगर कोई
कुछ फिजा में नमी सी बाकी है
रोया शायद है रात भर कोई
बुझ गया जो चराग जिंदा था
हो गया है शहर बदर कोई
फूल सेहरा के सुर्ख कर डाले
खून रोया है इस कदर कोई
रास्ते करते थे जो की चारागरी
ढूंढते अब हैं चारागर कोई

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