कभी सोचते है उन्हे हम भुला दे
कभी सोचते है उन्हे याद कर ले
कभी हम जुदाई के सदमे उठा ले
कभी हम अकेले में फरियाद कर ले
दिल का क्या करें साहिब हम उन्ही पे मरते है
जुर्म बस इतना है तुमसे प्यार करते है....
समुन्दर से जा कर करे इल्तजा
अगर मौज है तो इससे मोड़ दे
कभी जान के न लगाये लगन
ये शीशा जो हो तो इससे तोड़ दे
ये वफ़ा क्या है एक धोका है
करने वालो को किसने रोका है
झूठे वादे है झूठी क़समें है
लोग कह्ते है झूठी रस्में हैं
यहाँ बेअसर हैं सदायें सभी
यहाँ सब मुहबत में नाकाम हैं
यहाँ चाहतों का गुजरा नही
ये गलीआं ये कूंचे तो बदनाम हैं
लेकिन………..
दिल का क्या करें साहिब हम तुम्ही पे मरते है
जुर्म बस इतना है तुमसे प्यार करते हैं ...
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