Sunday, June 7, 2009

unknown

कभी सोचते है उन्हे हम भुला दे
कभी सोचते है उन्हे याद कर ले
कभी हम जुदाई के सदमे उठा ले
कभी हम अकेले में फरियाद कर ले
दिल का क्या करें साहिब हम उन्ही पे मरते है
जुर्म बस इतना है तुमसे प्यार करते है....

समुन्दर से जा कर करे इल्तजा
अगर मौज है तो इससे मोड़ दे
कभी जान के न लगाये लगन
ये शीशा जो हो तो इससे तोड़ दे

ये वफ़ा क्या है एक धोका है
करने वालो को किसने रोका है
झूठे वादे है झूठी क़समें है
लोग कह्ते है झूठी रस्में हैं

यहाँ बेअसर हैं सदायें सभी
यहाँ सब मुहबत में नाकाम हैं
यहाँ चाहतों का गुजरा नही
ये गलीआं ये कूंचे तो बदनाम हैं
लेकिन………..
दिल का क्या करें साहिब हम तुम्ही पे मरते है
जुर्म बस इतना है तुमसे प्यार करते हैं ...

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