वोह आँख के कहने पे सफारत नही करता
दिल है कभी उस की हिमायत नही करता
किस बात पे रूठा है पता हो तो मनाऊँ
वोह रूठ तो जाता है शिकयत नही करता
हर बात में हैं उस के सौ सौ मतलब
वोह बात तो करता है वजाहत नही करता
उस शख्स के वादों में वफ़ा आए किधर से
वादे भी जो राह-ए-मुहबत नही करता
में उस से रूठ कर जाती नही के अक्सर
रूठूं तो मनाने की भी ज़हमत नही करता
मैं उस के लिए सारे ज़माने से बुरी हूँ
वोह शख्स जो ख़ुद से भी बगावत नही करता !!
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