Saturday, May 30, 2009

unknown

दुःख दर्द के मारों से मेरा जीकर न करना...
घर जाओ तोह यारों से मेरा जीकर न करना...
वोह ज़ब्त न कर पाएंगे आंखों के समंदर...
तुम राह गुज़रों से मेरा जीकर न करना...
फूलों के नशेमन में रहा हूँ में सदा से...
देखो कभी खारों से मेरा जीकर न करना...
शायद ये अंधेरे ही मुझे राह दिखाएँ...
अब चाँद सितारों से मेरा ज़िकर न करना...
वोह मेरी कहानी को ग़लत रंग न दे दें...
अफसाना निगारों से मेरा ज़िकर न करना...
शायद वोह मेरे हाल पे बेसाख्ता रोया दें...
इस बार बहारों से मेरा ज़िकर न करना...
ले जायेंगे गहराई में तुमको भी बहा कर...
दरिया के किनारों से मेरा ज़िकर न करना...
वोह शख्स मिले तोह उससे हर बात बताना...
तुम सिर्फ़ इशारों से मेरा ज़िकर न करना...

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